“हलो! ताना?” मैंने कहा। फोन लाउडस्पीकर पर था। "और क्या हाल है?” सामने से तानसेन की आवाज आई। ताना नाम तानसेन का छोटा रूप था। हालाँकि उसका असली नाम तानसेन भी नहीं था। उसका असली नाम भूपसिंह था। चूँकि दोनों नाम एक सी गुणवत्ता लिए हुए थे, इसलिए कोई उसे किसी भी नाम से बुलाए … Continue reading बार-बार!? (भाग-6,दोस्त ताना किताब वाला)
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ऐसी भी क्या जिद।
ऐसी भी क्या जिद, जो खुद पर रहम ना खाते।
बार-बार!? (भाग-5, घिसती पेंसिल।)
हर बार सीखा अनसीखा हुआ और मैंने फिर से सीखा। पूरी ज़िंदगी ये बार-बार हुआ।
बार-बार!? (भाग-4, एक सहेजी तस्वीर)
“वाओ ```” सिया के हाथ में एक नए मोबाइल फोन का डिब्बा देख कर मेरे मुंह से निकला। ”मैंं इसी के बारे में ही सोच रहा था। अगर मैंं इसमें टाइप कर लिखुगा तो लिखाई गंदी वाली कोई परेशानी ही नहीं रहेगी।” मैंंने सिया की तरफ बढ़ते हुए कहा।
बार-बार!? (भाग-3, सिया और साहिल की केमेस्ट्री।)
कुँए के मेंडक को क्या पता कि बाहर एक पूरा समन्दर भी होता है। लेकिन समन्दर का मेंडक भी कहाँ आसानी से समझ पाता है कि जिन्दगी तो कुएं के मेंडक की भी होती है। उसी कुँए में कुँए के मेंडक का एक पूरा संसार होता है।उसी तरह साहिल और सिया के बीच के विज्ञान … Continue reading बार-बार!? (भाग-3, सिया और साहिल की केमेस्ट्री।)
बार बार!?(भाग-2, सिया और साहिल का क्या रिश्ता?)
जिंदगी सबकी अपनी एक किताब है। सबका अपना एक हिसाब है। पेन अपने हाथ में कब आयेगा कब जाएगा कुछ पता नहीं है। इसी छिना झपटी में सारी उम्र निकल जाती है। ये छिना झपटी चलती है इसांन और हालात के बीच। हालात शुरू से ही पेन इसांन के हाथ से छीनता रहता है। हालात … Continue reading बार बार!?(भाग-2, सिया और साहिल का क्या रिश्ता?)
मामूली :पूरी जिंदगी की याद
हम 10 वीं कक्षा में थोड़ा ज्यादा ही इज्जत-बेइज्जती की परवाह करते है। लङकीयो के सामने तो ये लङको की मौत का सवाल तक बन जाता है। लेकिन इस कहानी का पात्र इन सब से बहुत उपर उठ चुका था- आए दिन उसके साथ होने वाले हादसो के कारण। आइए मिलाता हूँ आपको उसकी जिंदगी … Continue reading मामूली :पूरी जिंदगी की याद
बार बार !? (भाग-1, तबियत)
"अब कैसी है तबियत? सिया ने पूछा। "हूह...ठीक हूं।" मेरी कांपती आवाज ने कहा। कम्बल के अंधेरे में मेरी आँखें खुली थी और नाक से निकलती गर्म सांसे मुझे जला रही थी। रविवार का दिन था और मैं पूरा बीमार था। पूरी सर्दियों में दो बार मैं पूरा बीमार होता था। और ये इस सर्दि … Continue reading बार बार !? (भाग-1, तबियत)
जिंदगी खुद एक दुर्घटना है।
जिंदगी खुद एक दुर्घटना है,बाकि जो हो रहा है, वो तो महज घटना है।जन्म भी कहाँ आसान था,तुम भी पीड़ा में थे और माँ भी,क्या खून-पसीना तब नहीं बहा था?अब तो महज खून-पसीने की बात होती है,जन्म के वक्त जितनी कहाँ काली रात होती है।जब धरती पर आये थे,तब कितने दर्द में होते थे तुम,दर्द … Continue reading जिंदगी खुद एक दुर्घटना है।
ये दिखावा कोई गलत तो नहीं।
कुछ लोग अच्छे हो जाते है, किरदार अपना अच्छा दिखाते दिखाते। कुछ लोग सही राह पर आ जाते है, दूसरों को राह दिखाते दिखाते। ये दिखावा कोई गलत तो नहीं। कुछ लोग कुछ काम का दे जाते है, ऐसे ही पकाते-पकाते। कुछ लोग किसी को उम्मीद दे जाते है, खुद मुरझाते-मुरझाते। कुछ लोग प्यार का … Continue reading ये दिखावा कोई गलत तो नहीं।








