हमारा दिमाग एक हॉरर मूवी को देखते वक्त जैसे काम करता है, उससे रिलेट कर हम डिप्रेशन में क्या-क्या होता है, उसे आसानी से समझ सकते है। हमारा दिमाग 'जैसी भावनाएं हम बना रहे है या यूं कंहे कि आसपास की स्थितियां जो हमारे अंदर भावनाएं बना रही है' हमे वैसा महसूस कराने के लिये … Continue reading Horror movies से depression की समझ।।
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आत्महत्या
Q.आत्महत्या क्यों गलत है? Ans. जो सारी सम्भावनाओ का ही अंत कर दे, वो निर्णय कभी सही नहीं हो सकता है। "जिंदा हो तो हजारों रास्ते है, मरने से ज्यादा पा लोगे तुम, जी कर यहां💕 बस जो खुद को खत्म करने के लिए हिम्मत जुटाई है, उसे ज़िन्दगी जीने में लगा दो तुम💞💕" (आप … Continue reading आत्महत्या
हमारा मदद माँगना कोई गलत बात नहीं|| गुजारिश दोबारा: मेरी नजर से(a new story )
ईथन और विक्रांत शाम के वक्त एक बड़े खुले पार्क में अपनी-अपनी व्हिलचेयर पर बैठे थे। तभी ईथन ने विक्रांत से पूछा, "तुम्हे कैसा लगता है जब तुम किसी से मदद मांगते हो?" विक्रांत ने झट से कहा, "कई बार मुझे थोडा अजीब जरूर महसुस होता है, जब में यह भूल जाता हूँ कि दुसरे … Continue reading हमारा मदद माँगना कोई गलत बात नहीं|| गुजारिश दोबारा: मेरी नजर से(a new story )
पहली बार कब महसूस हुआ की आप सच मे आजाद है।
अगर मैं खुद कि बात करु कि मुझे सच मे कब एहसास हुआ कि मैं एक प्रकार से आजाद हूँ और अभी भी अगर कुछ नहीं कर पाता हूँ तो इसके लिए केवल मैं खुद जीमेदार होऊगा। एक समय था जब मेरे पास व्हीलचेर नहीं थी मुझे घर वाले जहां भी एक जगह उठा कर … Continue reading पहली बार कब महसूस हुआ की आप सच मे आजाद है।
खुद शरीर को जाना, कुछ पहली बार किया
हलो दोस्तो, मै ठीक हूं उम्मीद है आप सब भी ठीक होंगे। बहुत बार मेरे साथ होता है कि मैं अपनी जो भी लिमिट्स है उसे नजरअंदाज करने की कोशिश करता हूं। माना कि किसी भी इंसान की कोई लिमिट नही होती है,अगर वो चाहे तो कुछ भी कर सकता है। लेकिन यहां मैं बात … Continue reading खुद शरीर को जाना, कुछ पहली बार किया
मैने कुछ समझा:बस अलग हूं मैं #34
हेलो दोस्तो, कल मैने एक एनीमेशन स्टोरी यहां शेयर की थी। वो एक तरीके से मेरी ही कहानी बयां करती है। जब मैं अपनी विकलांगता को समझने के काबिल नही था तो तब मेरी हालत कुछ उस स्टोरी के जेम्स जैसी ही थे। मैं लोगो के सामने खाना खाने से डरता था या यू कहे … Continue reading मैने कुछ समझा:बस अलग हूं मैं #34
गुजारीश: मेरी नजर से
गुजारीश: मेरी नजर से कुछ फिल्म ऐसी होती है जिन्हे केवल वही अच्छे से समझ पाते है जो अपनी जिंदगी को कहीं ना कहीं उस फिल्म से जोड़ पाते है। जहां बाकी सब स्टाइल और पर्दे पर रंगों को देखते है, वही रिलेट करने वालों के लिए फिल्म का उद्देश्य ही महत्वपूर्ण होता है। और … Continue reading गुजारीश: मेरी नजर से
Daily Diary #21 एक डर जो कुछ हद तक खत्म हो गया
हेलो दोस्तों मैंने पिछले दिनों एक पोस्ट देखी जिसने मेरी जिंदगी के सबसे बङे डर को पूरी तरह से खत्म कर दिया। मै सोचता था कि जो यह मेरी बीमारी है यह धीरे धीरे बढ़ रही है मुझे यह डर था की कहीं मैं अपने जो भी काम कर पाता हूं। अगर वह भी नहीं … Continue reading Daily Diary #21 एक डर जो कुछ हद तक खत्म हो गया
Daily Diary #5 (english)a person with disabilities; thought battle
(#english translation--gt)hello dosto!At this time I will not say that this is the first time but this level of confidences is the first time.The biggest problem with the person with disabilities is that even before thinking of going to anyehere , there are many thoughts in his mind that if that place will be suitable … Continue reading Daily Diary #5 (english)a person with disabilities; thought battle
Daily Dairy #14 विकलांग: मानसिक उलझन
hello dosto!अबकी बार ये तो नही कहूंगा की ये पहली बार है लेकिन confidences का ये level पहली बार है।विकलांग व्यक्ति के साथ सबसे बङी परेशानी ये होती है कि वह कही पर जाने के विचार से पहले ही उसके मन मे ये विचार आते है कि क्या वह स्थान उसके अनूकूल होगा?उसकी तरफ देखने … Continue reading Daily Dairy #14 विकलांग: मानसिक उलझन






