हम हमशक्ल

मेरा लिखी बातें मेरे लिए आईने का काम करती है आपकी लिखी बातें आपके लिए आईने का काम करती है ... और कभी-कभी हम हमशक्ल निकलते है। ।।।।।।।।।। अगर ख्यालात मिल जाए तेरे-मेरे कभी, तो कारण बस इतना सा होगा....

मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। (1)

मैं बचा ही नहीं जमाने में। मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। मैंने कुछ किया नहीं सिवाय छुपाने के। मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। क्या अच्छा था खुद को जलाने में। मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। अंधेरे से घोर अंधेरे तक का सफर था, मैं क्या बताऊँगा उजाले में। मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। कितना कुछ … Continue reading मैं क्या लिखूँगा अफसाने में। (1) →

कल्पना की 365 आँखे (4)

आँखे मिचती साँझ, रंग से बात करती दीवार, सुनाई देती ताली सात समन्दर पार, सर पर लिपटा ख्वाहिशों का मकड़ जाल, सिने से लग कर सोता हाल, हकीकत में तब्दील होता बहरूपिया ख्याल, चलते-चलते बदल जाती चाल, मासूम से आश्चर्य पर हँसता कमाल, देखा है कभी, आओ मैं दिखाता हूँ। तुम कल्पना की आँखे खुली … Continue reading कल्पना की 365 आँखे (4) →

(2) कल्पना की 365 आँखे

इंसान को बांहो से पकड़ पढ़ता अखबार, नगें बदन पर छपा कर्मो का इख्तियार, किताब के आगे लगा इंसानों का ढेरे, आमने-सामने खड़े ठोकर और पैर, बिना आवाज के मचा कहर, प्राण फूँकता बूढ़ा जहर, देखा है कभी, आओ मैं दिखाता हूँ। तुम कल्पना की आँखे खुली रखना। साँस लेती हथेली, धड़कते दांत, खाना चबाते … Continue reading (2) कल्पना की 365 आँखे →

कल्पना की 365आँखे (1)

आकाश में बहती सूखी नदी, जमीन पर पड़े बुझे तारे, हवा के साथ उड़ते पत्थर, आग में जमी बर्फ, सूरज में छुपा अंधेरा, दोपहर के बाद सवेरा, देखा है कभी, आओ मैं दिखता हूँ । तुम कल्पना की आँख खुली रखना। धरती के अंदर उल्टा लगा पेड़, शाखाओं पर जमीन से उठ लगते बेर, अन्तरिक्ष … Continue reading कल्पना की 365आँखे (1) →

अश्लील मूवी, जीवन में प्रभाव।

आज सुबह कोरा से एक प्रश्न मेरे सामने आया, जिसका उतर देना मैंने अपनी जिम्मेदारी समझी। क्योंकि आज के डिजिटल युग में युवाओं को नहीं पता है कि पोर्न उनके जीवन और जीवन के चैन को किस तरह से बर्बाद कर रहा है। प्रश्न था- अश्लील मूवी देखने से हमारे जीवन में इसका क्या प्रभाव … Continue reading अश्लील मूवी, जीवन में प्रभाव। →

बार-बार!? (भाग-7, दो घाव)

सिया मेरी मैली पेंट उठाए मेरे पास आई। उसने मुझे पेंट के पीछे का हिस्सा दिखाया। "ये क्या है?" सिया ने पूछा। " चल दिखा तेरे पीछे हाल क्या हो रखा है।" मुझे देखते ही माजरा समझ में आ गया। मैं डर गया। मेरे दांत भींच गए। इस चीज से मैं सबसे ज्यादा डरता था। … Continue reading बार-बार!? (भाग-7, दो घाव) →